जब शाम उदास कर जाती है

तेरी यादें....
जब
शाम उदास कर जाती है ....
और डूबते सूरज की की रोशनी मध्यम हो जाती है ....
मै बैठी हू आज भी चुपचाप सी....
खिड़की के पास,
आते जाते चेहेरों को निहारती .....
फ़िर से ये आंखे भर आई है आज,
हर चहरे में तुम्हे तलाशती ......
बस यु ही गुजार जाती है
तेरी यादो भरी ये शाम .......................
आता है जब रात का पहर
और छाती है चाँद की रोशनी...
तुमको अपनी निगाहों मे बस के
बंद करती हूँ जब पलकें
ना जाने कब आ जाती है नीद
तुम्हे पाने का अधूरा ख्वाब लिए
और यूँ ही गुजर जाती है रात .....................................
आती है एक नई सुबह
फ़िर एक नयी उम्मीद लिए,
तुमसे मिलने की नई आस लिए..

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  1. bahut hi sunder kavita....bahut gahra bhaav sanjoye

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  2. भावपूर्ण रचना है। बधाई। कहते हैं कि-

    मिलन हुआ था जो कल सपन में, क्या तुमने देखा जो मैंने देखा।
    तेरे सामने दफन हुआ दिल, क्या तुमने देखा जो मैंने देखा।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  3. अच्छा लिखा है।

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  4. बहुत अच्छी रचना...विरह का सटीक विवरण...बधाई.
    नीरज

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  5. मैंने कहा उससे तुम यू उदास न रहा करो
    तुम्हारे उदास होने से
    आसमान का चाँद भी उदास हो जाता है
    तारे टिमटिमाना छोड़ देते है
    पूर्णिमा की रात भी अमावस सी लगाती है
    और ………
    मेरे चाँद ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूछा
    और ……..और क्या
    मैंने कहा
    और ……..और इस मुस्कान के चेहरे की मुस्कान भी गायब हो जाती है
    वह मुस्कुराया और बोला ………
    इस चेहरे की मुस्कान को देखकर ही तो मैं अपने हर गम भूल जाता हूँ
    पर मेरी मुस्कान तो तुमसे है

    --K Muskan

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  6. ek sms padha tha kuchh dino pehle...

    khule aasma na zameen ki talash kar,
    sab kuchh yahin hai na kahin aur talash kar,
    har aarzoo puri ho to jeene ka kya maza,
    jeene k liye tu bas ek kami ki talash kar.

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I am Shalini, PhD Student at Department of Chemistry of DDU Gorakhpur University. I am working on Nanomaterials used as catalyst on the thermal decomposition of Ammonium Perchlorate (AP, NH4ClO4) and on burning rate of composite solid rocket propellants in Prof. Gurdip Singh's Research Group.

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